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महात्मा गांधी सेतु के नीचे का इलाका बनेगा ग्रीन जोन, पटना में लौटेगी हरियाली और नया शहरी सौंदर्य

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पटना के महात्मा गांधी सेतु के नीचे वर्षों से अतिक्रमण और बदहाली का शिकार रहा इलाका अब ग्रीन जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। नगर निगम ने हरियाली, फाउंटेन और आधुनिक सुविधाओं के साथ इसे नया आकर्षण केंद्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

पटना/आलम की खबर: राजधानी पटना में शहरी सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। वर्षों तक अतिक्रमण, अव्यवस्था और बदहाली की गिरफ्त में रहा महात्मा गांधी सेतु के नीचे का पूरा इलाका अब पूरी तरह से नए रूप में विकसित किया जाएगा। गायघाट से लेकर डंका इमली और बिस्कोमान गोलंबर तक फैले इस लंबे क्षेत्र को नगर निगम ने ग्रीन जोन के रूप में विकसित करने की विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह वही इलाका है, जो लंबे समय से अनियंत्रित कब्जों, अस्थायी दुकानों और अव्यवस्थित यातायात के कारण अपनी पहचान खो चुका था, लेकिन अब इसे राजधानी के सबसे आकर्षक शहरी स्थलों में शामिल करने की तैयारी चल रही है।

नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। सुरक्षा और संरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंटीले तार लगाए गए हैं, ताकि दोबारा अवैध कब्जा न हो सके। अब इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा, जिसमें रंग-बिरंगे फूलों के पौधे, छायादार वृक्ष और पर्यावरण को संतुलित रखने वाले विशेष प्रजातियों के पौधे शामिल होंगे। इस पूरे इलाके को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह न केवल देखने में सुंदर लगे, बल्कि शहर के प्रदूषण स्तर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

योजना के अनुसार, इस ग्रीन जोन में आधुनिक लैंप पोस्ट, आकर्षक फाउंटेन, पैदल चलने के लिए सुंदर पाथवे और बैठने के लिए विशेष स्थान बनाए जाएंगे। इसके अलावा कई जगहों पर सेल्फी प्वाइंट भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह इलाका युवाओं और परिवारों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन सके। रात के समय पूरी लाइटिंग व्यवस्था इसे और भी आकर्षक बनाएगी, जिससे यह क्षेत्र दिन और रात दोनों समय जीवंत नजर आएगा।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय सुधार भी है। पेड़ों और हरियाली के माध्यम से तापमान नियंत्रण, धूल और प्रदूषण में कमी तथा शहर के लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र के विकसित होने के बाद यह पटना के उन चुनिंदा स्थानों में शामिल होगा, जहां लोग सुकून और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि 1990 के दशक में इसी क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में अशोक वाटिका जैसी हरियाली हुआ करती थी, जहां बड़े-बड़े अशोक वृक्षों की छांव लोगों को गर्मी में राहत देती थी। समय के साथ अतिक्रमण और अनियोजित विकास के कारण वह हरियाली खत्म हो गई, लेकिन अब उसी पुराने सौंदर्य को फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है। यह पहल न केवल अतीत की यादों को वापस लाएगी, बल्कि भविष्य के लिए एक स्थायी पर्यावरणीय मॉडल भी तैयार करेगी।

डंका इमली क्षेत्र में स्थित अंबेडकर गोलंबर का भी इस परियोजना के तहत कायाकल्प किया जाएगा। इसे भी आकर्षक रूप देकर पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं गायघाट स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय गुलजारबाग के पास निर्माणाधीन सेतु के नीचे की जर्जर सड़क को भी जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा। इस काम की जिम्मेदारी अब नगर निगम से हटाकर पथ निर्माण विभाग को सौंप दी गई है, ताकि कार्य तेजी से पूरा हो सके।

इस पूरे प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद गांधी सेतु के नीचे का इलाका राजधानी पटना की नई पहचान बन सकता है। समानांतर बन रहे नए गांधी सेतु और ग्रीन जोन के संयोजन से यह क्षेत्र जेपी गंगा पथ जैसी आधुनिक और आकर्षक पहचान की ओर बढ़ सकता है। शहर में बढ़ते शहरीकरण के बीच यह परियोजना लोगों को न केवल एक सुंदर सार्वजनिक स्थान देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश भी देगी।

इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय से उपेक्षित इस क्षेत्र के बदलने से न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि आसपास के इलाकों की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सही तरीके से लागू हुई तो यह पटना के शहरी विकास मॉडल में एक मिसाल बन सकती है।

यह पूरा प्रोजेक्ट आने वाले समय में पटना की शहरी छवि को बदलने वाला साबित हो सकता है, जहां हरियाली, आधुनिक सुविधाएं और व्यवस्थित संरचना एक साथ देखने को मिलेगी।

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